instruction stringclasses 105
values | input stringclasses 1
value | output stringlengths 256 9.75k | metadata unknown |
|---|---|---|---|
महाभारत में त्याग के बारे में क्या कहा गया है? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
सर्वैः सवानि शुभाशुभानि नियतं कर्माणि जन्तुः सवयं; गर्भात संप्प्रतिपद्यते तद उभयं यत तेन पूर्वं कृतम मृत्युश चापरिहारवान समगतिः कालेन विच्छेदिता; दारॊश चूर्णम इवाश्मसारविहितं कर्मान्तिकं परापयेत
हिंदी: 12-287-21 अथान्तरे च तं तत्रेति ध. पाठः॥ 12-287-22 सुरारातिनिबर्हणेति थ. पाठः॥ 12-28... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
निमिस्तु राजा विप्रांस्तान्समानीय नराधिपः ।अयजद्धिमवत्पार्श्वे स्वपुरस्य समीपतः ।पञ्चवर्षसहस्राणि राजा दीक्षामुपागमत् ।। ७.५५.१२ ॥
यह श्लोक कांड, सर्ग में है।
याद रखो, भगवान ने कहा है - कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह भगवद गीता और अन्य शास्त्रों पर आधारि... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
हनुमान जी की भक्ति के बारे में बताइए। | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
न च मे भविता तत्र कश्चित् पथि परिश्रमः ।पृष्ठतः तव गच्चन्त्या विहार शयनेष्व् अपि ॥२-३०-११॥
तव your, पृष्ठतः behind, गच्छन्त्याः going, मे to me, तत्र there, पथि on the way, विहारशयनेष्विव on a pleasure stroll or in a (luxurious) couch, कश्चित् even a little, परिश्रमः strain, न भविता will ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
हनुमान जी की भक्ति के बारे में बताइए। | वत्स, रामायण के अनुसार:
राजा दशरथः श्रीमान् यथा मम मया यशाः ।पूजनीयः च मान्यः च तथा अयम् पतगेश्वरः ॥३-६८-२६॥
महायशाः illustrious, श्रीमान् prosperous, राजा king, दशरथः Dasaratha, मम for me, यथा as, पूजनीयश्च worthy of reverence, मान्यश्च worthy of honour, अयम् this, पतगेश्वरः lord of the birds, तथा in the same way.
... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
चाणक्य नीति में सफलता के लिए क्या कहा गया है? | श्रद्धालु, महाभारत के अनुसार:
बालॊ ऽपि यौवनं पराप्तॊ मानुषेषु विशां पते सर्वास्त्रेषु परं वीरः परकर्षम अगमद बली
हिंदी: 1-143-12 अवगाढं जलावगाहिनम्॥ 1-143-13 मोक्ष्यध्वं मोचयध्वम्॥ त्रिचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्यायः॥ 143 ॥
यह 1 पर्व में है।
याद रखो, भगवान ने कहा है - कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 1,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
भीष्म पितामह ने सत्य पर क्या कहा? | प्रणाम, महाभारत के अनुसार:
सर्ववेदाधिगमनं सर्वतीर्थावगाहनम सत्यं च वदतॊ राजन समं वा सयान न वा समम
हिंदी: 1-69-7 प्राचेतसः प्राचे देशाय यज्ञक्रियया अतति सततं गच्छतीति प्राचेताः तस्य प्राचेतसः प्राचीनबर्हिषः। पुण्यजनाः पुण्योत्पादकास्तपः शीला इत्यर्थः। यैस्ते महौजसो महाप्रभावा वृक्षौषधयो दग्धाः॥ 1-69-9 वीरिण्या वीरणपुत... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 1,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
महाभारत की सबसे बड़ी शिक्षा क्या है? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
शतान्य उपरि चैवाष्टौ तथा भूयश च सप्ततिः गजानां तु परीमाणम एतद एवात्र निर्दिशेत
हिंदी: 1-2-3 क्षत्र क्षत्रियजातिं। अमर्षः स्वपितुः क्षत्रियेण हतत्वाज्जातस्य क्रोधस्यासहनं तेन चोदितः प्रेरितः॥ 1-2-10 निषिषिधुः निषिद्धवन्तः। अक्षराधिक्यमार्ष॥ 1-2-14 भूदोषाः निम्नोन्नतत्वकण्टकित्वादयः॥ 1-2... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 1,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
चाणक्य नीति में सफलता के लिए क्या कहा गया है? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
न हि तेषाम अहं दरुग्धस तत तेषां दॊषवद गतम अरेर हि दुर हताद भेयं भग्नपृष्टाद इवॊरगात
हिंदी: 12-83-1 सभासदः व्यवहारनिर्णायका। सहायाः युद्धादावुपयोगिनः। सुहृदो हितकर्तारः। परिच्छदाः सेनान्यादयः॥ 12-83-2 क्रमेणैषां लक्षणान्याह हीति। कथयितुं न्यायान्यायौ वक्तुम् हीनिषेधास्तथा दान्ताः सत्यलज... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
भीष्म पितामह ने नेतृत्व पर क्या कहा? | श्रद्धालु, महाभारत के अनुसार:
युद्धशास्त्रविद एव तवं न वृद्धाः सेवितास तवया समास विस्तर विदां न तेषां वेत्षि निश्चयम
हिंदी: 12-19-1 अपराणि धर्मशास्त्राणि। पराणि ब्रह्मशास्त्राणि॥ 12-19-2 अमूलानि च शास्त्राणि हेतुभिश्चित्रितानि च। निश्चयश्चैष यन्मन्त्र इति ट. ड. पाठः॥ 12-19-3 त्वं तु केवलमस्त्रज्ञ इति झ.पाठः॥ 12-19-11... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
श्री राम ने धर्म कैसे सुलझाया? | वत्स, रामायण के अनुसार:
ततः तदा बहु विध भावित आत्मनः ।कृत आत्मनो जनक सुताम् सुवर्त्मनः ।अपश्यतो अभवद् अतिदुह्खितम् मनः ।सुचक्षुषः प्रविचरतो महात्मनः ॥५-७-१७॥
ततः from there, तदा then, बहुविधभावितात्मनः thinking of many things in his mind, कृतात्मनः of a great soul, सुवर्त्मनः of the followers of righteous path, सुचक्... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
रामायण में बलिदान के बारे में क्या कहा गया है? | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
बुद्ध्या हि अष्ट अंगया युक्तम् चतुर् बल समन्वितम् ।चतुर् दश गुणम् मेने हनुमान् वालिनः सुतम् ॥४-५४-२॥
हनूमान् Hanuman, वालिनः Vali's, सुतम् son, अष्टाङ्गया with eight limbs, बुद्ध्या with intellect, युक्तम् endowed, चतुर्बलसमन्वितम् possessed of four kinds of strength, चतुर्दशगुणम् having ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
विदुर नीति में शक्ति के बारे में क्या है? | श्रद्धालु, महाभारत के अनुसार:
दुष्प्रज्ञाः के चिद आभान्ति के चिद आभान्ति पण्डिताः महाप्रज्ञास तथैवान्ये जञानविज्ञानदर्शिनः
हिंदी: 7-132-4 ऋग्वेदोऽथर्ववेदश्चेति क.ङ.ध.पाठः॥ 7-132-14 प्रादुर्भावश्चरमधातुः॥ 7-132-16 भूतग्रामं चतुर्विधं तत्तेजसस्तस्य त्रिगुणमयस्य रेतसः सम्बन्धी यस्तेजोंशो रजोंशस्तस्मात्तैजसप्रवृत्तिप्रधा... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 13,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
श्री राम ने कर्तव्य कैसे सुलझाया? | प्रणाम, रामायण के अनुसार:
कृतार्था हि अकृतार्थानाम् मित्राणाम् न भवन्ति ये ।तान् मृतान् अपि क्रव्यादाः कृतघ्नान् न उपभुंजते ॥४-३०-७२॥
यः हि he who, शुभं वा good or, यदि वा or else, पापम् sin, उदीरितम् which has been promised, वाक्यम् words, सत्येन truly, प्रतिगृह्णाति will follow, सः वीरः he is a hero, पुरुषोत्तमः t... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
रामायण से बलिदान के बारे में क्या सीख सकते हैं? | वत्स, रामायण के अनुसार:
स हि तस्याभिसङ्क्रुद्धः प्रगृह्य विपुलां शिलाम्।विरूपाक्षाय चिक्षेप सुग्रीवो जलदोपमाम् ।। ६.९७.२२ ।।
सःसुग्रीवः तस्य अभिसङ्कृद्धः विपुलाम् जलदोपमाम् शिलाम् प्रगृह्य विरूपाक्षाय चिक्षेप
Holding a huge rock which was like a mass of clouds, Sugriva, who was very angry, hurled at Virupaksha.
इस ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | वत्स, रामायण के अनुसार:
ते तम् प्रदक्षिणम् कृत्वा सगरस्य महात्मनः ।षष्टिः पुत्र सहस्राणि पश्चिमाम् बिभिदुर् दिशम् ॥१-४०-१९॥
महाबला: possessed of great strength, ते they, पश्चिमायां दिश्यपि in the western quarter also, महान्तम् great, अचलोपमम् resembling mountain, सौमनसम् named Saumanasa, दिशागजम् elephant of the quar... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
सीता जी की वीरता के बारे में बताइए। | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
दशाननो भ्रातरमाप्तवादिनम् ।विसर्जयामास तदा विभीषणम् ॥६-१०-२९॥
सुरसैन्यनाशनः one who is a destroyer of Devatas army, महाबलः mighty, संयति in war, चण्डविक्रमः of formidable valour, दशाननः tenheaded, इत्येवम् in this way, उक्त्वा: having spoken, आप्तवादिनम् one who gave good advice, विभीषण... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
भीष्म पितामह ने धर्म पर क्या कहा? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
स वै यदा सत्त्वगुणेन युक्तस; तमॊ वयपॊहन घतते सवबुद्ध्या स लॊहितं वर्णम उपैति नीलॊ; मनुष्यलॊके परिवर्तते च
हिंदी: 12-271-4 छिन्ना विशस्ता स्थूणा प्रतिमा शरीरं यस्य तम्॥ 12-271-5 निश्चितं वचनं निर्वचनम्। एषा स्वस्ति गोभ्योऽस्त्विति हिंसा कतौ पश्वालम्भः॥ 12-271-9 वेदकृतां वेदोक्तां हिंसाम... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
सीता जी की वीरता के बारे में बताइए। | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
सोमस्याहं सुदयितः सुतः सुरुचिरानने ।भजस्व मां वरारोहे भक्त्या स्निग्धेन चक्षुषा ।। ७.८९.४ ॥
O you of a graceful presence, I am the most favourite son of the moon; O fair one, do you, with delight, cast looks upon me.
यह श्लोक कांड, सर्ग में है।
याद रखो, भगवान ने कहा है - कर्म करो, फ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
हनुमान जी की भक्ति के बारे में बताइए। | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
तं प्रासमालोक्य तदा विभग्नं सुपर्णकृत्तोरगभोगकल्पम्।तलं समुद्यम्य स वालिपुत्रस्तुरङ्गमं तस्य जघान मूर्ध्नि ।। ६.६९.९३ ।।
सःवालिपुत्रः तदा विभग्नम् सुवर्णकृत्तोरगभोगकल्पम् प्रासम् आलोक्य तलम् उद्यम्य तुरङ्गमस्य मूर्ध्नि तस्यजघान
Then Vali's son beholding the broken and shattered spear f... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
रामायण से त्याग के बारे में क्या सीख सकते हैं? | प्रणाम, रामायण के अनुसार:
न भेतव्यं न गन्तव्यं निवर्तध्वं रणे सुराः ।एष गच्छति पुत्रो मे युद्धार्थमपराजितः ।। ७.२८.६ ॥
Be not afraid, O you celestials; do not fly away; come back to the battle; this my son, who has never been vanquished, goes to battle.
शांति और समभाव से आगे बढ़ो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह भ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
सीता जी की वीरता के बारे में बताइए। | प्रणाम, रामायण के अनुसार:
रावणो अयम् इति ज्ञात्वा तलेन अभिजघान ह ।स वालि पुत्र अभिहतो वक्त्रात् शोणितम् उद्वमन् ॥४-४८-२१॥
वालिपुत्राभिहतः struck by the son of Vali, सः असुरः that demon, वक्त्रात् from the mouth, शोणितम् blood, उद्वमन् vomitting, पर्यस्तः uprooted, पर्वतः इव like a mountain, भूमौ on the ground, अभ्यप... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
रामायण में त्याग के बारे में क्या कहा गया है? | प्रणाम, रामायण के अनुसार:
वाग्यतः सह वैदेह्या भूत्वा नियतमानसः ।श्रीमत्यायतने विष्णोः शिश्ये नरवरात्मजः ॥२-६-४॥
नरवरात्मजः son of the king (Rama), आत्मनः of his own, प्रियम् welfare, आशास्य seeking, तस्य हविषः of that havis, शेषं the remainder, प्राश्य च having partaken, देवम् नारायणम् God Narayana, ध्यायन् meditati... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
चाणक्य नीति में सफलता के लिए क्या कहा गया है? | प्रणाम, महाभारत के अनुसार:
कषेत्रस्थेषु च सस्येषु शत्रॊर उपजपेन नरान विनाशयेद वा सर्वस्वं बलेनाथ सवकेन वै
हिंदी: 12-69-3 अधर्मेभ्य इति प़ञ्चमी॥ 3॥ 12-69-11 कपणो न त्विति झ. पाठः॥ 12-69-18 अयोगेन अनुप्रायेन॥ 12-69-20 योगक्षेमस्य नाशाच्चेति ट. ड. थ. पाठः॥ 12-69-30 सीमन्तकरी त्र्यवस्यापिका॥
यह 12 पर्व में है।
सत्य और ... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
रामायण में निष्ठा के बारे में क्या कहा गया है? | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
ततः तौ देश कालज्ञौ खड्गाभ्याम् एव राघवौ ।अच्छिन्दताम् सुसंहृष्टौ बाहू तस्य अंस देशतः ॥३-७०-८॥
ततः then, सुसंविग्नौ became agitated, देशकालज्ञौ knowers of time and space, तौ those two, राघवौ Raghavas, खड्गाभ्याम् with their swords, तस्य his, बाहू two arms, अंसदेशतः from the shoulders, अच्... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
सीता जी की वीरता के बारे में बताइए। | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
अश्रुपूर्णमुखी दीना बाष्पगद्गदया गिरा ।। ५.४०.२१।।।।
जनकात्मजा उत्पातकृतोत्साहम् वर्धमानम् महावेगम् तं हरिपुङ्गवम् आवेक्ष्य अश्रुपूर्णमुखी दीना बाष्पगद्गदया गिरा उवाच
Seeing Hanuman eager to leap, enlarging his body quickly, she appeared pitiable with her face filled with tears and thr... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
विदुर नीति में धर्म के बारे में क्या है? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
संदर्शनं च कृष्णस्य संवादश चैव सत्यया वरीहि दरौणिकम आख्यानम ऐन्द्रद्युम्नं तथैव च
हिंदी: 1-2-3 क्षत्र क्षत्रियजातिं। अमर्षः स्वपितुः क्षत्रियेण हतत्वाज्जातस्य क्रोधस्यासहनं तेन चोदितः प्रेरितः॥ 1-2-10 निषिषिधुः निषिद्धवन्तः। अक्षराधिक्यमार्ष॥ 1-2-14 भूदोषाः निम्नोन्नतत्वकण्टकित्वादयः॥ ... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 1,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
विदुर नीति में मोक्ष के बारे में क्या है? | वत्स, महाभारत के अनुसार:
यस तव अवध्यवधे दॊषः स वध्यस्यावधे समृतः एषैव खलु मर्यादा याम अयं परिवर्जयेत
हिंदी: 12-140-2 घृणां दयाम्। तथा वर्तेत भूमिपः इति ट. ड. थ. द. पाठः॥ 12-140-3 शत्रुंजयस्य च इति झ. पाठः॥ 12-140-20 नानार्थिकः बहुप्रयोजनवान्। कृतघ्ने पुरुषे अर्थसंबन्धं न समाचरेत्॥ 12-140-21 वराहस्य श्रेयोमूलोत्खननम्।... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
विदुर नीति में धर्म के बारे में क्या है? | वत्स, महाभारत के अनुसार:
तवम एकः सर्वमर्त्येषु विमानवरम आस्थितः चरिष्यस्य उपरिस्थॊ वै देवॊ विग्रहवान इव
हिंदी: 1-57-23 योजनायमविस्तारा अपि मन्त्रसामर्थ्यात्स्वल्पप्रमाणाः अगस्त्यकरगतसमुद्रवद्वह्नौ प्रवेशयोग्या भवन्ति॥ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः॥ 57 ॥
शांति और समभाव से आगे बढ़ो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह भगवद गीत... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 1,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
महाभारत में धर्म के बारे में क्या कहा गया है? | श्रद्धालु, महाभारत के अनुसार:
इमाम अवस्थां संप्राप्तं दीनम आर्तं शरियश चयुतम यद अन्यत सुखम अस्तीह तद बरह्मन्न अनुशाधि माम
हिंदी: 12-105-4 अभिपन्नोऽस्मि पौरुषेणेति शेषः॥ 12-105-6 प्रमाणं विश्वासम्॥ 12-105-7 स्वशास्त्रे नीतिशास्त्रे॥ 12-105-8 ग्रहणं आदरम्॥ 12-105-13 श्वेतकाकीयैः श्वा च एतश्च काकश्च तेषामिति धर्माः। क्र... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
सीता जी की वीरता के बारे में बताइए। | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
ततः तत् राम पंपायाः तीरम् आश्रित्य पश्चिमम् ।आश्रम स्थानम् अतुलम् गुह्यम् काकुत्स्थ पश्यसि ॥३-७३-२८॥
तत्र There, नागा: elephants, तम् that, आश्रमम् hermitage, आक्रमितुम् to attack, न शक्नुवन्ति not able, तस्मिन् in that, पर्वते in the mountain, वने forest, विविधाः many, नागाः elephants, त... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
सीता जी की वीरता के बारे में बताइए। | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
अक्षया नर शार्दूल जितालोका मया शुभाः ।ब्राह्म्याः च नाक पृष्ठ्याः च प्रतिगृह्णीष्व मामकान् ॥३-५-३१॥
अक्षया imperishable, नरशार्दूल O best men, मया by me, शुभाः auspicious, ब्राह्म्याः pertaining to Brahma's, नाकपृष्ठ्याश्च pertaining to heavenly abode, लोकाः worlds, जिताः are conquered... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
गीता के अनुसार कर्म कैसे करूँ? | आयुष्मान भव! भगवद गीता के अनुसार:
न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः। यानेव हत्वा न जिजीविषाम स्तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः।।2.6।।
।।2.6।। हम यह भी नहीं जानते कि हमलोगोंके लिये युद्ध करना और न करना - इन दोनोंमेंसे कौन-सा अत्यन्त श्रेष्ठ है; और हमें इसका भी पता नहीं है कि हम उन्हें जीतेंगे ... | {
"text_type": "gita",
"chapter": 2,
"verse": 6,
"type": "practical_guidance"
} | |
हनुमान जी की भक्ति के बारे में बताइए। | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
तस्मिन्गीते तु विज्ञाय सीतापुत्रौ कुशीलवौ ।तस्याः परिषदो मध्ये रामो वचनमब्रवीत् ।दूताञ्छुद्धसमाचारानाहूयात्ममनीषया ।। ७.९५.२ ॥
यह श्लोक कांड, सर्ग में है।
याद रखो, भगवान ने कहा है - कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह भगवद गीता और अन्य शास्त्रों पर आधारित है... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
महाभारत में नेतृत्व के बारे में क्या कहा गया है? | वत्स, महाभारत के अनुसार:
तं तु धौम्यादयॊ विप्राः परिवार्यॊपतस्थिरे बृहस्पतिसमा मुख्याः परजापतिम इवामराः
हिंदी: 1-214-1 शमिता यज्ञे पशुवधकर्ता तस्य भावः शामित्रम्॥ 1-214-3 यत्र प्रजापतिस्तत्र सोमादयः समाजग्मुः॥ 1-214-11 तस्याः अश्रुबिन्दुः। सन्धिरार्षः॥ 1-214-21 ततः शीघ्रमप्रवेशाद्धेतोः॥ 1-214-23 हे भव अद्य त्वमशेषस्य... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 1,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
रामायण में भक्ति के बारे में क्या कहा गया है? | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
स निगृह्य तु तम् बाष्पम् प्रमृज्य नयने शुभे ।विनिःश्वस्य च तेजस्वी राघवम् पुनरूचिवान् ॥४-८-३१॥
तेजस्वी brilliant, सः he, तं बाष्पम् his tears, निगृह्य controlled, शुभे auspicious, नयने eyes, प्रमृज्य wiped, विनिःश्वस्य took deep breath, राघवम् to Rama, वाक्यम् these words, अब्रवीत् said... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
महाभारत में बलिदान के बारे में क्या कहा गया है? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
अन्यायेन परवृत्तानि निवृत्तानि तथैव च अन्तरा विलयं यान्ति यथा पथि विचक्षुषः
हिंदी: 12-65-4 एतानि चातुराश्रम्यकारिणां लिङ्गानि सतां राज्ञां राजधर्मेष्वेव वर्तन्ते इत्यर्थः॥ 12-65-5 भैक्ष्याश्रमः ब्रह्मचर्यम्॥ 12-65-6 क्षमाश्रमो गार्हस्थ्यम्॥ 12-65-7 भैक्ष्याश्रमः संन्यासः॥ 12-65-8 दीक्ष... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
कर्म का सिद्धांत महाभारत में कैसे समझाया गया है? | प्रणाम, महाभारत के अनुसार:
[वासुदेव] कुकुराधिप यान मन्ये शृणु तान मे विवक्षतः नारदस्य गुणान साधून संक्षेपेण नराधिप
यह 12 पर्व में है।
शांति और समभाव से आगे बढ़ो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह भगवद गीता और अन्य शास्त्रों पर आधारित है, लेकिन यह किसी योग्य पंडित या गुरु की सलाह का विकल्प नहीं है।] | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
विदुर नीति में धर्म के बारे में क्या है? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
रूपम ऐश्वर्यम आरॊग्यम अहिंसा फलम अश्नुते फलमूलाशिनां राज्यं सवर्गः पर्णाशिनां तथा
हिंदी: 7-7-1 ब्राह्मणेष्वपि ऋषित्वं मन्त्रद्रष्टृत्वं गोत्रप्रवर्तकत्वं वा॥ 7-7-2 भरतस्यान्वये चैवाजमीढ इति झ.पाठः॥ 7-7-5 पिप्पलस्तस्य तनय इति य, पाठः। पल्लवस्तस्येति ट. पाठः॥ 7-7-6 प्रसवेन सोमाभिषवनिमित्... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 13,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | प्रणाम, रामायण के अनुसार:
अथ ताम् जात सम्तापाम् तेन वाक्येन मोदिताम् ।सरमा ह्लादयाम् आस महीं दग्धामिवाम्भसा ॥६-३४-१॥।।
अथ and thus, जातसन्तापाम् put off the agony, तेनवाक्येन by her words, मोदिताम् gladdened, ताम् that, सरमा Saarana, घौरीम् parched, महीम् earth, अम्भसाइव like rainwater, समाह्लादयामास consoled and del... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
हनुमान जी की भक्ति के बारे में बताइए। | प्रणाम, रामायण के अनुसार:
रामस्य तु वचः श्रुत्वा मुनि वेष धरम् च तम् ।समीक्ष्य सह भार्याभी राजा विगत चेतनः ॥२-३९-१॥
भार्याभिः सह with his wives, राजा king, रामस्य Rama's, वचः words, श्रुत्वा having heard, मुनिवेशधरम् dressed like an ascetic, तम् him, समीक्ष्य च beholding, विगतचेतन unconscious, दुःखेन with grief, सन्त... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
श्री राम ने बलिदान कैसे सुलझाया? | वत्स, रामायण के अनुसार:
अम्ब केन अत्यगात् राजा व्याधिना मय्य् अनागते ।धन्या राम आदयः सर्वे यैः पिता सम्स्कृतः स्वयम् ॥२-७२-२९॥
अम्ब O mother, राजा king, मयि my, अनागते even before I could return, केन व्याधिना by what ailment, अत्यगात् passed away, यैः by Rama and others, पिता father, स्वयम् personally, संस्कृतः has b... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
न हि कम्चन पश्यामो राघवस्यागुणम् वयम् ।दुर्लभो यस्य निरयः श्शाङ्कस्येव कल्मषम् ॥२-३६-२७॥
वयम् we, राघवस्य Rama's, अवगुणम् fault, कञ्चन even a little, न पश्यामः हि we do not see, शशाङ्कस्य moon's, कल्मषम् इव like stain, अस्य for this Rama, निरयः hell (blemish), दुर्लभः is difficult to find... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
महाभारत में शक्ति के बारे में क्या कहा गया है? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
सॊ ऽथ धर्माद अवाप्तेषु धनेषु कुरुते मनः तस्यैव सिञ्चते मूलं गुणान पश्यति यत्र वै
हिंदी: 12-265-14 तस्मादर्थार्जने बुद्धिरिति थ. पाठः॥ 12-265-16 पापं मनस्येवाधिगच्छतीति थ. पाठः॥ 12-265-18 क्षन्तव्यमित्ययं धर्म इति ध. पाठः॥ 12-265-21 योऽन्यस्य स्वादुवद्वक्ति कस्तं हिंसितुमिच्छतीति ट. थ. ... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
रामं प्रदक्षिणीकृत्य शिरसा ऽभिप्रणम्य च ।रामेण चाभ्यनुज्ञातः शत्रुघ्नः शत्रुतापनः ।। ७.६४.१६ ॥
यह श्लोक कांड, सर्ग में है।
याद रखो, भगवान ने कहा है - कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह भगवद गीता और अन्य शास्त्रों पर आधारित है, लेकिन यह किसी योग्य पंडित या... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
तानि माल्यानि जातानि मुनीनाम् तपसा तदा ।स्वेद बिन्दु समुत्थानि न विनश्यन्ति राघव ॥३-७३-२५॥
काकुत्थ्स Kakutstha, तेषाम् for them, गतानाम् who had gone, परिचारिणी their attendant, चिरजीविनी living for long years, शबरीनाम named Sabari, श्रमणी ascetic, अद्यापि even now, दृश्यते is seen.
O ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
महाभारत की सबसे बड़ी शिक्षा क्या है? | वत्स, महाभारत के अनुसार:
अदासः करियते दासॊ हरियन्ते च बलात सत्रियः एतस्मात कारणाद देवाः परजा पालान परचक्रिरे
हिंदी: 12-67-4 वैनयिकं अभ्युत्थानाभिवादनादिकम्। दक्षिणा दक्षिणातोऽनन्तरः। समीपे भूत्वाप्रदक्षिणीकृत्येत्यर्थः॥ 12-67-11 अनुदके अल्पोदके। निराक्रन्दे हिंस्रभयरहिते॥ 12-67-14 व्यायच्छमानान्स्वंस्वमर्थं अदातॄन्॥ ... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
कर्म का सिद्धांत महाभारत में कैसे समझाया गया है? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
यदर्थम आत्मप्रभवेह जन्म; तवॊत्तमं धर्मगृहे चतुर्धा तत साध्यतां लॊकहितार्थम अद्य; गच्छामि दरष्टुं परकृतिं तवाद्याम
हिंदी: 12-322-8 संवत्सरवियोगस्य संभवे नु इति ध. पाठः॥ 12-322-10 खण्डभागं दक्षिणत इति थ. पाठः॥ 12-322-13 छिद्रं छिद्रवन्तम्॥ 12-322-14 सुरभिद्रव्ये शवगन्धग्रह इत्यर्थः॥
यह ... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
विदुर नीति में शक्ति के बारे में क्या है? | प्रणाम, महाभारत के अनुसार:
एककालं चरन भैक्ष्यं गृहे दवे चैव पञ्च च सपृहा पाशान विमुच्याहं चरिष्यामि महीम इमाम
हिंदी: 12-9-1 मुहूर्तं तावदेकाग्रो मनः श्रोत्रेऽन्तरात्मनि। धारयन्नपि तच्छुत्वा रोचेत वचनं ममेति झ. पाठः। 12-9-8 पेशलान्रभ्यान्॥ 12-9-15 आत्मारामः योगेनात्मन्येव रममाणः। प्रसन्नात्मा शुद्धसत्वः। केनचिन्निमित्... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
चाणक्य नीति में सफलता के लिए क्या कहा गया है? | श्रद्धालु, महाभारत के अनुसार:
[उषनस] नमस तस्मै भगवते देवाय परभविष्णवे यस्य पृथ्वी तलं तात साकाशं बाहुगॊचरम
हिंदी: 12-271-4 छिन्ना विशस्ता स्थूणा प्रतिमा शरीरं यस्य तम्॥ 12-271-5 निश्चितं वचनं निर्वचनम्। एषा स्वस्ति गोभ्योऽस्त्विति हिंसा कतौ पश्वालम्भः॥ 12-271-9 वेदकृतां वेदोक्तां हिंसाम्। आचार इति बुद्ध्या अनाचारः आच... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | वत्स, रामायण के अनुसार:
ताव् अर्ध दिवसे श्रान्तौ दृष्ट्वा पुत्रौ मही तले ।रुरोद पुत्र शोकेन बाष्प पर्याकुल ईक्षणा ॥२-७४-१६॥
महीतले on the earth, अर्धदिवसे at midday, श्रान्तौ tired, पुत्रौ sons, दृष्ट्वा having seen, पुत्रशोकेन by the grief for her son, बाष्पपर्याकुलेक्षणा eyes filled with tears, रुरोद wailed.
On se... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
सीता जी की वीरता के बारे में बताइए। | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
कः त्वम् किम् वर्तसे ब्रह्मन् ज्ञातुम् इच्छामहे वयम् ।एकः त्वम् विजने दूरे वने चरसि शंस नः ॥१-१०-१२॥
ब्रह्मन् O Brahman, त्वं क: who are you? किं वर्तसे how are you subsisting? त्वम् you, एक: alone, विजने in a lonely, घोरे dreadful, वने in the forest, चरसि you are roaming, वयम् we, ज्ञातु... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
रामायण में कर्तव्य के बारे में क्या कहा गया है? | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
स भूमिपलो विलपन्ननाथवत् ।स्त्रीया गृहीतो हृदयेऽतिमात्रया ।पपात देव्याश्चरणौ प्रसारिता ।पुभावसम्प्राप्य यथातुरस्तथा ॥२-१२-११४॥
अतिमात्रया exceeding the limit of respect, स्त्रिया by a woman, हृदये in the heart, गृहीतः having grasped, सः that, भूमिपालः king, अनाथवत् like an orphan, विलपन्... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
महाभारत में नीति के बारे में क्या कहा गया है? | श्रद्धालु, महाभारत के अनुसार:
यथा यथास्य पराप्तव्यं पराप्नॊत्य एव तथा तथा भवितव्यं यथा यच च भवत्य एव तथा तथा
हिंदी: 12-219-1 न स वेद परं धर्मं इति ध. पाठः॥ 12-219-22 तपसस्तच्च लक्षणमिति थ. पाठः। तत्वलक्षणमिति ध. पाठः॥ 12-219-25 ग्राह्यमन्नं तपस्थिभिरिति ट. थ. पाठः॥ 12-219-29 देहान्ते विप्रमुच्यत इति ट. थ. पाठः। सदोत्... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
रामायण से बलिदान के बारे में क्या सीख सकते हैं? | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
येन सप्त महा साला गिरिर् भूमिः च दारिताः ।बाणेन एकेन काकुत्स्थ स्थाता ते को रण अग्रतः ॥४-१२-९॥
काकुत्स्थ O Rama, येन by such a person, एकेन बाणेन with a single arrow, सप्त seven, महासालाः great sala trees, गिरिः mountain, भूमिश्च even earth, दारिताः pierced, ते to you, रणाग्रतः in the ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
सीता जी की वीरता के बारे में बताइए। | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
त्वया अपि खलु तत् कार्यम् तयोः च नृप पुत्रयोः ।ब्राह्मणानाम् गुरूणाम् च मुनीनाम् वासवस्य च ॥४-६२-१४॥
त्वया your, अपि and, खलु for all, तत् that, कार्यं task, तयो: for both of them, च and, नृपपुत्रयोः princes, ब्राह्मणानां for the brahmins, सुराणां च and gods, मुनीनां for sages, वासवस्यच a... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
भीष्म पितामह ने कर्म पर क्या कहा? | वत्स, महाभारत के अनुसार:
यथा हि कनकं शुद्धं तापछेदनिघर्षणैः परीक्षेत तथा शिष्यान ईक्षेत कुलगुणादिभिः
हिंदी: 12-314-5 वैतृष्णं को न गच्छति इति ध. पाठः। किं न पृच्छसीति थ. पाठः॥ 12-314-15 एकस्यैव पत्नी एकपत्नी नत्वन्यपूर्वा। जात्याः पुत्रोत्पत्तेः योनिः स्यतानम्॥
इस श्लोक को अपने जीवन में उतारो।
[नोट: यह एक AI मार्गद... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
भीष्म पितामह ने धर्म पर क्या कहा? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
नैतज जञात्वा पुमान सत्री वा पुनर्भवम अवाप्नुयात अभव परतिपत्त्यर्थम एतद वर्त्म विधीयते
हिंदी: 12-242-1 उह्येत स्रोतसा यथेति झ. पाठः॥ 12-242-3 देशकर्मानुरागार्थानुपायेति झ. पाठः॥ 12-242-4 चक्षुराहारसंहारैरिति झ. पाठः। यच्छेद्वाचं मनो बुद्ध्येति थ. पाठः॥ 12-242-12 त्यागसूक्ष्मानुग इति झ. ... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
रामायण में धर्म के बारे में क्या कहा गया है? | वत्स, रामायण के अनुसार:
ततो द्यां पृथिवीं चैव वीक्षमाणा वनौकसः ।ददृशुः सन्ततौ बाणैर्भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ।। ६.४६.१ ।।।।
ततः द्याम् पृथिवींचैव वीक्षमाणा वनौकसः बाणैः सन्ततौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ददृशुः
Thereafter looking at the sky and the ground for Rama and Lakshmana, the Vanara leaders saw the two brothers, lying on ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
रामायण से बलिदान के बारे में क्या सीख सकते हैं? | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
एवमुक्त्वा स भरतं भार्यामभ्येत्य राघव: ।उवाच शोकसन्तप्त: पूर्णचन्द्रनिभाननाम् ॥ २.१०२.१४॥
सः राघवः भरतम् एवम् उक्त्वा पूर्णचन्द्रनिभाननाम् भार्याम् अभ्येत्य शोकसन्तप्तः उवाच
Having thus spoken to Bharata, Rama, overwhelmed with grief, approached his wife Sita whose face looked like the f... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
हनुमान जी की भक्ति के बारे में बताइए। | वत्स, रामायण के अनुसार:
ततः कदाचित् तम् देशम् आजगाम यदृच्छया ।विभाण्डक सुतः तत्र ताः च अपश्यत् वरांगनाः ॥१-१०-१०॥
तत: thereafter, कदाचित् on one day, विभण्डकसुत: son of Vibhandaka, यदृच्छया accidentally, तं देशम् towards that place, आजगाम came, तत्र there, ता: those, वराङ्गना: beautiful women, अपश्यत् saw.
One day t... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
भीष्म पितामह ने नेतृत्व पर क्या कहा? | प्रणाम, महाभारत के अनुसार:
संधातव्यं बुधैर नित्यं वयवस्यं च हितार्थिभिः अमित्रैर अपि संधेयं पराणा रक्ष्याश च भारत
हिंदी: 12-136-4 औषधीश्छित्त्वा ताभिरिन्धनीकृताभिर्भोज्या व्रीह्याद्याः। दुष्टान् हिंसित्वा साधून्पालयेदिति भावः॥
याद रखो, भगवान ने कहा है - कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
महाभारत की सबसे बड़ी शिक्षा क्या है? | श्रद्धालु, महाभारत के अनुसार:
संभॊजनी नाम पिशाचदक्षिणा; सा नैव देवान न पितॄन उपैति इहैव सा भराम्यति कषीणपुण्या; शालान्तरे गौर इव नष्टवत्सा
यह 13 पर्व में है।
सत्य और धर्म का मार्ग सदा श्रेष्ठ होता है।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह भगवद गीता और अन्य शास्त्रों पर आधारित है, लेकिन यह किसी योग्य पंडित या गुरु की सला... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 13,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | प्रणाम, रामायण के अनुसार:
भ्रातुरादेशमाज्ञाय लक्ष्मणो वा परन्तपः ।स किमर्थं नरवरो न मां रक्षति राघवः ।। ५.६७.२२ ।।।।
यह श्लोक कांड, सर्ग में है।
शांति और समभाव से आगे बढ़ो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह भगवद गीता और अन्य शास्त्रों पर आधारित है, लेकिन यह किसी योग्य पंडित या गुरु की सलाह का विकल्प नहीं है।] | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
रामायण से सत्य के बारे में क्या सीख सकते हैं? | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
सर्व सम्पत्तयो राम स्वस्तिमान् गच्च पुत्रक ।स्वस्ति ते अस्तु आन्तरिक्षेभ्यः पार्थिवेभ्यः पुनः पुनः ॥२-२५-२२॥
अन्तरिक्षेभ्यः from the sky, पुनः again, पार्थिवेभ्यः from earthly gods (kings), पुनः again, सर्वेभ्यः from all, देवेभ्यश्चैव from devatas also, ये ते परिपन्थिन from all those who ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
महाभारत में नेतृत्व के बारे में क्या कहा गया है? | श्रद्धालु, महाभारत के अनुसार:
अत्र ते वर्तयिष्यामि यथा धर्मः पुरातनः वयवहार परवृत्तानां तन निबॊध युधिष्ठिर
हिंदी: 12-79-2 राज्ञां शान्तिकपौष्टिकादिकर्मप्रयोगशुद्ध्याख्यं प्रतिकर्म ऋत्विग्भिः कर्तव्यमित्यर्थः॥ 12-79-5 त्रिभिः श्रुतवृत्तवशैः। शुक्लैनिंर्दोषैः॥ 12-79-7 इदं देयमिदं देयमिति यदिदं वेदवचनमिति इति शब्दाध्याह... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
चाणक्य नीति में सफलता के लिए क्या कहा गया है? | प्रणाम, महाभारत के अनुसार:
यद्य एनम अपि मातस तवं माम इवाण्ड विभेदनात न करिष्यस्य अदेहं वा वयङ्गं वापि तपस्विनम
यह 1 पर्व में है।
याद रखो, भगवान ने कहा है - कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह भगवद गीता और अन्य शास्त्रों पर आधारित है, लेकिन यह किसी योग्य पंडित या गुरु की सलाह का विकल्प नही... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 1,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
चाणक्य नीति में सफलता के लिए क्या कहा गया है? | प्रणाम, महाभारत के अनुसार:
[भ] यॊ वरतं वै यथॊद्दिष्टं तथा संप्रतिपद्यते अखण्डं सम्यग आरब्धं तस्य लॊकाः सनातनाः
हिंदी: 7-74-7 कुहकानि च वार्ष्णेय सर्वास्ता इति ट.थ.पाठः॥ 7-74-13 एताः पूजिता दिक्कृता वा तुल्यवद्विकारं जनयन्तीत्यर्थः॥ 7-74-14 इमाः स्त्रीरूपाः धार्मिक्य इति श्रुतं सावित्र्यादिषु दृष्टं च॥
यह 13 पर्व में... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 13,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
विदुर नीति में युद्ध के बारे में क्या है? | वत्स, महाभारत के अनुसार:
भगॊ ऽंशश चार्यमा चैव मित्रॊ ऽथ वरुणस तथा सविता चैव धाता च विवस्वांश च महाबलः
हिंदी: 12-201-4 स्पर्शनमिन्द्रियाणामिति ध. पाठः॥ 12-201-8 एवमस्ति नवेत्यन्यो न वेत्ति न परायणम् इति ध. पाठः॥ 12-201-13 ज्ञानेन गृह्यते इति ट.ड.थ.पाठः॥
सत्य और धर्म का मार्ग सदा श्रेष्ठ होता है।
[नोट: यह एक AI मार्ग... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
रामायण में प्रेम के बारे में क्या कहा गया है? | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
सुरासुरैरवध्यत्वं दत्तमस्मै स्वयम्भुवा।एतच्च कवचं दिव्यं रथश्चैषो ऽर्कभास्वरः ।। ६.७१.३२ ।।
स्वयम्भूव अस्मै सुरासुरैः अवध्यत्वम् दत्तम् एतत् दिव्यम् कवचं च रभास्वरः रथश्च
"Exemption from death from gods and demons was given to him and all this wonderful shield and chariot as bright as ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
रामायण में बलिदान के बारे में क्या कहा गया है? | वत्स, रामायण के अनुसार:
चकार रक्षाम् कौसल्या मन्त्रैः अभिजजाप च ।उवाचातिप्रहृष्टेव सा दुःखवशर्तिनी ॥२-२५-३९॥
दुःखवशवर्तिनी filled with distress, सा she, अतिप्रहृष्टेव as if she was exceedingly happy, संसज्जमानया with confused, वाचा with a tone, वाङ्मात्रेण in mere words, उवाच said, भावेन न not with mind.
Even thoug... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
महाभारत में त्याग के बारे में क्या कहा गया है? | वत्स, महाभारत के अनुसार:
कषुत्पिपासा शरमाविष्टॊ मुनिर उद्दालकिस तदा यमं पश्येति तं पुत्रम अशपत स महातपाः
हिंदी: 7-70-1 जन्मनैव संस्काराद्यभावेऽपि ब्राह्मणो नमस्य एव। प्रश्रितं पक्वमन्नं तत्स्वाग्रे भोक्तुमर्हः प्रश्रिताग्रभुक्॥ 7-70-2 सुमनसां देवानां मुखमिव भूताः सुमनोमुखाः॥ 7-70-3 नोऽस्माकं द्विषतः शत्रून्। तैरपूजित... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 13,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
सीता जी की वीरता के बारे में बताइए। | वत्स, रामायण के अनुसार:
सह रामेण निर्यातः विना रामम् इह आगतः ।सूतः किम् नाम कौसल्याम् शोचन्तीम् प्रति वक्ष्यति ॥२-५७-२१॥
रामेण सह with Rama, निर्यातः went out, विना रामम् without Rama, इह here, आगतः returned, सूतः charioteer, शोचन्तीम् worrying, कौशल्याम् Kausalya, किं नाम what can, प्रतिवक्ष्यति will he say?
The ch... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
हनुमान जी की भक्ति के बारे में बताइए। | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
अतीव वातः तिमिरम् बुभुक्षा च अत्र नित्यशः ।भयानि च महान्ति अत्र ततः दुह्खतरम् वनम् ॥२-२८-१८॥
अत्र there (in the forest), वाताः wind, तिमिरम् darkness, अतीव is extreme, नित्यशः always, बुभुक्षा hunger, महान्ति great, भयानि च fears also, ततः therefore, वनम् forest life, दुःखतरम् is extrem... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
चाणक्य नीति में सफलता के लिए क्या कहा गया है? | वत्स, महाभारत के अनुसार:
यॊगेन बहुधात्मानं कृत्वा तिष्ठामि मूर्तिषु अग्निहॊत्रेषु सत्रेषु करियास्व अथ मखेषु च
हिंदी: 1-7-2 समं पक्षपातहीनां। व्यभिचारः अपराधः॥ 2 ॥ 1-7-8 आपः सोमाज्य प्रभृतयोग्नौ हूयमाना देवपितृरूपाः। अग्नौ हुता आप एव देवताशरीररूपेण परिणमन्त इत्यर्थः॥ 1-7-9 देवादिभावस्यापि कर्मप्राप्यत्वाद्देवानां पितॄ... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 1,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
हनुमान जी की भक्ति के बारे में बताइए। | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
अपि चास्मिन् हते राजन् नान्यं पश्यामि खेचरम् ।इह यः पुनरागच्छेत् परं पारं महोदधेः ।। ५.५२.२०।।।।
राजन् अपि च अस्मिन् हते यः महोदधेः परं पारम् पुनः इह आगच्छेत् अन्यम् खेचरम् न पश्यामि
"O king If he is killed, I do not see any one who can cross this great ocean and come by air to reach thi... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
कर्म का सिद्धांत महाभारत में कैसे समझाया गया है? | प्रणाम, महाभारत के अनुसार:
तां तु दृष्ट्वा महादेवीं तप्यमानां महत तपः दक्षस्य दुहिता देवी सुरभिर नाम नामतः
हिंदी: 7-82-3 एवमृत्विगात्मस्त्रीशुद्धिमुक्त्वा धनशुद्ध्यर्थं दायविभागं प्रस्तौति॥ 7-82-4 रतिमिच्छत एव विहिता नतु धर्मम्॥ 7-82-6 किं कियत्प्रमाणम्॥ 7-82-9 प्रायश्चित्तमात्मन इच्छति प्रायश्चित्तीयते॥ 7-82-10 द्वि... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 13,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
रामायण से निष्ठा के बारे में क्या सीख सकते हैं? | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
अब्रवीच्च परिष्वज्य सौमित्रिं राघवस्तदा ।दिष्ट्या त्वां वीर पश्यामि मरणात् पुनरागतम् ।। ६.१०२.३९ ।।
हरयः भूतलात् उत्थितम् तंलक्ष्मणम् दृष्टवा सुप्रीताः साधुसाधुइति लक्ष्मणम् प्रत्यपूजयन्
Having embraced Sumitra's son, Raghava then addressed him saying, “By good fortune it is that, O he... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
महाभारत की सबसे बड़ी शिक्षा क्या है? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
उभौ हिनस्ति न भुनक्ति चैषा; या चानृचे दक्षिणा दीयते वै आघातनी गर्हितैषा पतन्ती; तेषां परेतान पातयेद देव यानात
यह 13 पर्व में है।
याद रखो, भगवान ने कहा है - कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह भगवद गीता और अन्य शास्त्रों पर आधारित है, लेकिन यह किसी योग्य पंड... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 13,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | वत्स, रामायण के अनुसार:
एवम् त्वयि तत् न चित्रम् भवेत् यत् सौम्य शोभनम् ।जानामि अहम् त्वाम् सुग्रीव सततम् प्रिय वादिनम् ॥४-३९-४॥
सौम्य gentle one, सुग्रीव Sugriva, एवम् that way, त्वयि you, शोभनम् well done, तत् that, चित्रम् surprising, न भवेत् will not be, त्वाम् you, सततम् always, प्रियवादिनम् pleasing in talk, अ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
सीता जी की वीरता के बारे में बताइए। | वत्स, रामायण के अनुसार:
बाहु वेग प्रणुन्नेन सागरेण अहम् उत्सहे ।समाप्लावयितुम् लोकम् स पर्वत नदी ह्रदम् ॥४-६७-१२॥
अहम् I, बाहुवेगप्रणुन्नेन can drive away with my arms with high speed, सागरेण the ocean, सपर्वतनदीह्रदम् with mountains, rivers and lakes, लोकम् world, प्लावयितुम् to submerge, उत्सहे eager.
'I can subme... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | प्रणाम, रामायण के अनुसार:
तत्तृतीयं हनुमतो दृष्ट्वा कर्म सुदुष्करम् ।साधु साध्विति भूतानि प्रश्शंसुस्तदा हरिम् ॥५-१-१७२॥
सुदुष्करम् very difficult, हनुमतः of Hanuman, तत् that, तृतीयं कर्म a third feat, दृष्ट्वा after witnessing, तदा then, भूतानि living beings, साधु साधु इति welldone, welldone this, हरिम् vanara, प्... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | वत्स, रामायण के अनुसार:
स्त्रियो हि स्त्रीषु द्Rश्यन्ते सदा सम्परिमार्गणे ।यस्य सत्त्वस्य या योनिः तस्याम् तत् परिमार्ग्यते ॥५-११-४३॥
यस्य whose, सत्त्वस्य of a being, या whichever, योनिः source, तत् that, तस्याम् in that, परिमार्ग्यते is searched, नष्टा lost, प्रमदा woman, मृगीषु among female deer, परिमार्गितुम् to ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | आयुष्मान भव! रामायण के अनुसार:
मम वृद्धस्य कैकेयि गतान्तस्य तपस्विनः ।दीनम् लालप्यमानस्य कारुण्यम् कर्तुमर्हसि ॥२-१२-३४॥
कैकेयि O Kaikeyi, वृद्धस्य of the aged, गतान्तस्य on the verge of death, तपस्विनः wretched, दीनम् pitifully, लालप्यमानस्य wailing, मम to me, कारुण्यम् mercy, कर्तुम् to show, अर्हसि behoves you.
O... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
श्री राम ने सत्य कैसे सुलझाया? | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
शत साहस्रम् अव्यग्रम् आरक्षम् मध्यमम् कपिः ।रक्षोधिपतिनिर्दिष्टम् ददर्शान्तःपुराग्रतः ॥५-४-२३॥
कपिः vanara, अन्तःपुराग्रतः in front of the harem, रक्षोधिपतिनिर्दिष्टं ordered (stationed) by the lord of demons, शतसाहस्रम् one hundred thousand, अव्यग्रम् vigilant, मध्यमम् midst, आरक्षम् arm... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
चाणक्य नीति में सफलता के लिए क्या कहा गया है? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
रजश च हि तमश च तवा सपृशतॊ न जितेन्द्रियम निष्प्रीतिं नष्ट संतापं तवम आत्मानम उपाससे
हिंदी: 12-220-2 महत्सुखं मोक्षम्॥ 12-220-3 जनको जनकवंश्यः नाम्रा जनदेवः॥ 12-220-4 पाषण्डा लोकायतादयस्तेषां वादिनः प्रतिभटत्वेन जेतारः॥ 12-220-6 कापिलेयः कपिलायाः पुत्रः। परिधावन् एकत्र वासमकुर्वन्॥ 12-2... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
सीता जी की वीरता के बारे में बताइए। | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
विमुक्तकवचस्तत्र वध्यमानो ऽपि रावणिः ।त्रिदशैः सुमहावीर्यैर्न चकार च किञ्चन ।। ७.२९.२५ ॥
यह श्लोक कांड, सर्ग में है।
सत्य और धर्म का मार्ग सदा श्रेष्ठ होता है।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह भगवद गीता और अन्य शास्त्रों पर आधारित है, लेकिन यह किसी योग्य पंडित या गुरु की सलाह का विकल्... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
विदुर नीति में त्याग के बारे में क्या है? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
सर्वतॊ भवतः कषेमं विधेयाः सर्वपार्थिवाः तत किमर्थम इहाभीक्ष्णं परिशॊचसि दुःखितः धयायन्न इव च किं राजन नाभिभाषसि किं चन
हिंदी: 1-94-4 गान्धर्वो वरवध्वोरैकमत्येन कृतः॥ 1-94-5 फलाहारः फळन्याहर्तुं गतः॥ 1-94-17 पञ्चानां ब्राह्मादीनां त्रयो ब्राह्मदैवप्राजापत्या धर्म्याः। द्वावर्षासुरो कन्य... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 1,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
भीष्म पितामह ने युद्ध पर क्या कहा? | वत्स, महाभारत के अनुसार:
[आर्ज] न वयाजेन चरेद धर्मम इति मे भवतः शरुतम न सत्याद विचलिष्यामि सत्येनायुधम आलभे
हिंदी: 1-205-12 विजिगीषिणौ विजिगीषावन्तौ॥ 1-205-29 वनोद्देशे रङ्गदृशां निवासस्थाने॥ 1-205-34 समुत्क्षिप्य कूष्माण्डफलवदपातयत्॥ 1-205-57 अवहारो युद्धान्निवर्तनं॥ 1-205-59 संयुगे तत्कर्म कृत्वा तूष्णींभूताविति शे... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 1,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
कर्म का सिद्धांत महाभारत में कैसे समझाया गया है? | आयुष्मान भव! महाभारत के अनुसार:
बुद्धिशूरास तथैवान्ये कषमा शूरास तथापरे आर्जवे च तथा शूराः शमे वर्तन्ति मानवाः
हिंदी: 7-74-7 कुहकानि च वार्ष्णेय सर्वास्ता इति ट.थ.पाठः॥ 7-74-13 एताः पूजिता दिक्कृता वा तुल्यवद्विकारं जनयन्तीत्यर्थः॥ 7-74-14 इमाः स्त्रीरूपाः धार्मिक्य इति श्रुतं सावित्र्यादिषु दृष्टं च॥
यह 13 पर्व में... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 13,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
चाणक्य नीति में सफलता के लिए क्या कहा गया है? | वत्स, महाभारत के अनुसार:
अनन्तम अचलं देवं हंसं नारायणं परभुम धातारम अजरं नित्यं तम आहुः परम अव्ययम
हिंदी: 1-57-23 योजनायमविस्तारा अपि मन्त्रसामर्थ्यात्स्वल्पप्रमाणाः अगस्त्यकरगतसमुद्रवद्वह्नौ प्रवेशयोग्या भवन्ति॥ सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्यायः॥ 57 ॥
यह 1 पर्व में है।
शांति और समभाव से आगे बढ़ो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक ह... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 1,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
रामायण से धर्म के बारे में क्या सीख सकते हैं? | श्रद्धालु, रामायण के अनुसार:
दह्यमाने च लाङ्गूले चिन्तयामास वानरः ।। 5.53.34।।।।
लाङ्गूले दह्यमाने वानरः चिन्तयामास सर्वतः प्रदीप्तः अयम् अग्निः माम् कस्मात् न दहति
When the tail was burning, the vanara wondered how the fire ablaze on every side was not burning him:
इस श्लोक को अपने जीवन में उतारो।
[नोट: यह एक AI ... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
महाभारत की सबसे बड़ी शिक्षा क्या है? | प्रणाम, महाभारत के अनुसार:
वीरणश चाप्य अधीत्यैनं रौच्याय मनवे ददौ रौच्यः पुत्राय शुद्धाय सुव्रताय सुमेधसे
हिंदी: 12-336-2 तदात्वायतिसंहितम् तदात्वे तत्काले आयतौ उत्तरकाले च संहितं सम्यक्हितम्॥ 12-336-14 सोपप्लवो राहुग्रस्तः॥ 12-336-15 वेदध्वनिनिराकृत इति झ. ट. पाठः॥ 12-336-19 तदाज्ञापय देवर्षे इति ड. पाठः॥ 12-336-21 ... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 12,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
भीष्म पितामह ने त्याग पर क्या कहा? | वत्स, महाभारत के अनुसार:
शुभानाम अशुभानां च कर्मणां फलसंचये विपाकज्ञाश च ये देवि ते नराः सवर्गगामिनः
हिंदी: 7-132-4 ऋग्वेदोऽथर्ववेदश्चेति क.ङ.ध.पाठः॥ 7-132-14 प्रादुर्भावश्चरमधातुः॥ 7-132-16 भूतग्रामं चतुर्विधं तत्तेजसस्तस्य त्रिगुणमयस्य रेतसः सम्बन्धी यस्तेजोंशो रजोंशस्तस्मात्तैजसप्रवृत्तिप्रधानं जङ्गममभूत्॥ 7-132-1... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 13,
"verse": 0,
"type": "practical_guidance"
} | |
चाणक्य नीति में सफलता के लिए क्या कहा गया है? | प्रणाम, महाभारत के अनुसार:
असकृच चापि संतीर्य दूरपारं भुजप्लवैः पथि परच्छन्नम आसेदुर धार्तराष्ट्र भयात तदा
हिंदी: 1-138-10 उपस्थानगृहैः यत्र राजानं कार्यिणः शूराश्चोपतिष्ठन्ति तैर्गृहैः। वलभीभिरुभयतो नमत्पक्षाभिः स्तम्भशालाभिः। यन्त्रैर्जलयन्त्रैः शतधारादिभिः। यतो युगपच्छतं धारा उच्छलन्त्यो नीहारीभूय भवनोदरं व्याप्नु... | {
"text_type": "mahabharata",
"parva": 1,
"verse": 0,
"type": "wisdom"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | प्रणाम, रामायण के अनुसार:
अहमेको ऽपि पर्याप्तः सराक्षसगणां पुरीम् ।तां लङ्कां तपसा हन्तुं रावणं च महाबलम् ।। ५.५९.७ ।।।।
अहम् एकोऽपि सराक्षसगणाम् तां लङ्कां पुरीम् महाबलम् रावणं च तरसा हन्तुम् पर्याप्तः
I, alone, all the demon troops, and that city of Lanka, the great army, and Ravana, quickly, can kill, is enough
... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
सीता जी की वीरता के बारे में बताइए। | वत्स, रामायण के अनुसार:
कथयिष्यन्ति लोकेषु पुरुषाः कर्म कुत्सितम् ।सुनृशम्सम् अधर्मिष्ठम् तव शौण्डीर्य मानिनः ॥३-५३-८॥
शौण्डीर्यमानिनः considering yourself to be brave, तव yourself, सुनृशंसम् this very cruel act, अधर्मिष्ठम् unrighteous, कुत्सितम् despised by others, कर्म action, लोकेषु in the worlds, पुरुषाः people,... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} | |
श्री राम आदर्श पुरुष क्यों माने जाते हैं? | वत्स, रामायण के अनुसार:
राघवस्य वचः श्रुत्वा ह्यगस्त्यो भगवानृषिः ।उवाच रामं प्रहसन्पितामह इवेश्वरम् ।। ७.३१.५ ॥
यह श्लोक कांड, सर्ग में है।
याद रखो, भगवान ने कहा है - कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
[नोट: यह एक AI मार्गदर्शक है। यह भगवद गीता और अन्य शास्त्रों पर आधारित है, लेकिन यह किसी योग्य पंडित या गुरु की सलाह... | {
"text_type": "ramayana",
"kanda": "",
"sarga": "",
"verse": 0,
"type": "character_wisdom"
} |
End of preview. Expand in Data Studio
No dataset card yet
- Downloads last month
- 20